Good Friday 2026: तिथि, महत्व और यह दिन “Good” क्यों कहलाता है?

Good Friday 2026 सिर्फ एक तारीख नहीं है—जानिए यह दिन “Good” क्यों कहलाता है और इसका असली अर्थ क्या है।

Good Friday 2026 पर यीशु मसीह का बलिदान और क्रूस का धार्मिक महत्व

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Good Friday ईसाइयों के लिए इतना पवित्र क्यों है और आज भी हमें क्या सिखाता है?

Good Friday ईसाई धर्म का ऐसा दिन है, जो शांति, मौन और गहन आत्म-चिंतन से जुड़ा हुआ है। यह दिन दिखने में भले ही दुख और शोक से भरा लगे, लेकिन इसके भीतर छुपा संदेश त्याग, क्षमा और प्रेम का है—जो इसे केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि एक मानवीय मूल्य-दिवस बना देता है। Good Friday 2026 में भी यही भावना दुनिया-भर में महसूस की जाएगी, जब करोड़ों लोग यीशु मसीह के बलिदान को याद करेंगे।

ईसाई मान्यता के अनुसार, Good Friday वह दिन है जब यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया था। यह घटना केवल एक ऐतिहासिक प्रसंग नहीं, बल्कि ईसाई विश्वास की आत्मा मानी जाती है। माना जाता है कि यीशु ने मानवता के पापों के प्रायश्चित के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। यही कारण है कि यह दिन दुखद होते हुए भी “Good” कहलाता है—क्योंकि इसके परिणामस्वरूप मानवता को मोक्ष और आशा का मार्ग मिला।

Good Friday 2026 का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आज की तेज़, तनावपूर्ण और स्वार्थ-प्रधान दुनिया में त्याग और करुणा जैसे मूल्य धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं। ऐसे समय में यह दिन हमें रुककर सोचने पर मजबूर करता है—क्या हम क्षमा करना जानते हैं? क्या हम दूसरों के लिए कुछ त्याग कर सकते हैं? यही प्रश्न इस दिन को केवल ईसाइयों तक सीमित नहीं रहने देते, बल्कि हर संवेदनशील व्यक्ति से जोड़ देते हैं।

भारत जैसे विविधता-भरे देश में Good Friday एक सार्वजनिक अवकाश के रूप में भी मनाया जाता है। चर्चों में विशेष प्रार्थनाएँ होती हैं, घंटियाँ शांत रहती हैं और कई लोग उपवास रखते हैं। यह सब केवल परंपरा नहीं, बल्कि उस पीड़ा और प्रेम की याद है जिसे यीशु ने मानवता के लिए सहा। Good Friday 2026 पर भी यही वातावरण देखने को मिलेगा—मौन में छुपी श्रद्धा और शांति में बसी सीख।

Good Friday 2026 कब है और यह दिन बाकी दिनों से इतना अलग क्यों माना जाता है?

Good Friday 2026 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। कैलेंडर में यह तारीख एक साधारण शुक्रवार जैसी लग सकती है, लेकिन ईसाई समुदाय के लिए यह वर्ष का सबसे गंभीर, भावनात्मक और आध्यात्मिक दिन होता है। इस दिन चर्चों में न तो उत्सव होता है, न घंटियाँ बजती हैं और न ही किसी प्रकार की खुशी का प्रदर्शन—बल्कि हर ओर मौन, प्रार्थना और आत्म-चिंतन का वातावरण रहता है।

Good Friday की तारीख हर साल बदलती है, क्योंकि यह सीधे Easter Sunday से जुड़ी होती है। Easter, वसंत पूर्णिमा (Spring Full Moon) के बाद आने वाले रविवार को मनाया जाता है, और उसके ठीक दो दिन पहले Good Friday आता है। यही वजह है कि Good Friday 2026 की तिथि 3 अप्रैल तय होती है। यह गणना इसे एक साधारण धार्मिक दिन नहीं, बल्कि खगोलीय और आध्यात्मिक संतुलन से जुड़ा पर्व बनाती है—जो पाठकों के लिए इसे और भी रोचक बना देती है।

अब सवाल उठता है—जब यह दिन शोक और दुख से जुड़ा है, तो इसे “Good” क्यों कहा जाता है? यही वह बिंदु है जहाँ Good Friday बाकी सभी दिनों से अलग हो जाता है। ईसाई विश्वास के अनुसार, इस दिन हुआ बलिदान मानवता के लिए मोक्ष का मार्ग खोलता है। दुख का यह दिन भविष्य की आशा का आधार बनता है। यही “Good” का वास्तविक अर्थ है—अस्थायी पीड़ा के बाद स्थायी उद्धार।

भारत में Good Friday 2026 को इसलिए भी विशेष माना जाएगा क्योंकि यह दिन सरकारी अवकाश होता है। स्कूल, कॉलेज और कई दफ्तर बंद रहते हैं, जिससे लोग चर्च जाकर प्रार्थना कर सकें या घर पर शांत वातावरण में इस दिन का महत्व समझ सकें। कई लोग इस दिन उपवास रखते हैं, मांसाहार से दूर रहते हैं और सांसारिक गतिविधियों को सीमित कर देते हैं—ताकि ध्यान पूरी तरह आत्मिक शुद्धि पर केंद्रित रहे।

👉 यहाँ एक ज़रूरी सवाल उठता है:
क्या Good Friday केवल एक तारीख है, या इसके पीछे कोई ऐसा इतिहास छुपा है जिसने पूरी मानव सभ्यता को प्रभावित किया?

Good Friday का ऐतिहासिक और धार्मिक अर्थ क्या है, और यह घटना मानव इतिहास में इतनी निर्णायक क्यों मानी जाती है?

Good Friday सिर्फ एक धार्मिक स्मृति नहीं है, बल्कि यह मानव इतिहास की सबसे प्रभावशाली घटनाओं में से एक मानी जाती है। इस दिन घटी घटना ने न केवल ईसाई धर्म की दिशा तय की, बल्कि दुनिया को न्याय, अन्याय, सत्ता और बलिदान के अर्थ पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया। यही कारण है कि Good Friday 2026 भी हमें बीते समय की उस घटना से जोड़ता है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

ईसाई ग्रंथों के अनुसार, Good Friday के दिन यीशु मसीह को रोमन शासन के दौरान सूली पर चढ़ाया गया। उस समय यरूशलेम रोमन साम्राज्य के अधीन था, और धार्मिक व राजनीतिक सत्ता के बीच तनाव अपने चरम पर था। यीशु की शिक्षाएँ—जिनमें प्रेम, क्षमा और समानता पर ज़ोर दिया गया—सत्ताधारी वर्ग को चुनौती देने लगीं। यही टकराव धीरे-धीरे उनके विरुद्ध षड्यंत्र का कारण बना।

यीशु मसीह को सूली क्यों दी गई?

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो यीशु को किसी अपराध के ठोस प्रमाण के कारण नहीं, बल्कि जनता पर उनके प्रभाव और धार्मिक नेतृत्व को मिले खतरे के कारण दंडित किया गया। उन पर “यहूदियों का राजा” होने का आरोप लगाया गया, जो रोमन सत्ता के लिए सीधी चुनौती माना गया। उस दौर में सत्ता बनाए रखने के लिए सच्चाई से ज़्यादा राजनीतिक संतुलन को महत्व दिया गया—और यही Good Friday की त्रासदी की जड़ थी।

यह घटना हमें बताती है कि इतिहास में कई बार सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ती है। यही कारण है कि Good Friday केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि साहस और सत्य के लिए खड़े होने का प्रतीक भी बन गया।

यह घटना मानव इतिहास में इतनी निर्णायक क्यों मानी जाती है?

Good Friday का महत्व इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि यहीं से ईसाई धर्म की मूल अवधारणा—बलिदान के माध्यम से मुक्ति—जन्म लेती है। यीशु की मृत्यु को पराजय नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक आध्यात्मिक विजय के रूप में देखा गया। यही सोच आगे चलकर Easter Sunday के पुनरुत्थान की आशा में बदल जाती है।

इतिहासकारों और धर्मशास्त्रियों दोनों के अनुसार, अगर Good Friday न होता, तो ईसाई धर्म आज जिस रूप में है, शायद वैसा कभी बन ही नहीं पाता। यह दिन सत्ता बनाम नैतिकता, हिंसा बनाम करुणा और डर बनाम विश्वास के संघर्ष को दर्शाता है—जो हर युग में प्रासंगिक रहता है।

👉 अब ज़रा खुद से सवाल पूछिए:
क्या Good Friday सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना है, या यह हमें यह सिखाता है कि सच्चे परिवर्तन की शुरुआत अक्सर त्याग और पीड़ा से होती है?

Good Friday को “बलिदान का प्रतीक” क्यों कहा जाता है, और यह त्याग हमें क्या सिखाता है?

Good Friday को केवल एक शोक-दिवस कहना इसके अर्थ को सीमित कर देना होगा। वास्तव में, यह दिन बलिदान की पराकाष्ठा का प्रतीक है—ऐसा बलिदान, जो किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि मानवता के प्रति प्रेम और करुणा से प्रेरित था। यही वजह है कि Good Friday 2026 भी लोगों को दुख में डुबोने के बजाय, भीतर से बदलने की शक्ति रखता है।

ईसाई विश्वास में यह माना जाता है कि सूली पर चढ़ना केवल शारीरिक पीड़ा नहीं थी, बल्कि मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी एक गहरा कष्ट था। इसके बावजूद, प्रतिशोध या घृणा का मार्ग नहीं चुना गया—बल्कि क्षमा और प्रेम को सर्वोच्च रखा गया। यही वह बिंदु है जहाँ Good Friday साधारण धार्मिक स्मृति से ऊपर उठकर मानवीय मूल्यों का पाठ बन जाता है।

बलिदान का वास्तविक अर्थ क्या है?

अक्सर हम बलिदान को किसी बड़ी कुर्बानी तक सीमित समझ लेते हैं, लेकिन Good Friday हमें सिखाता है कि बलिदान का अर्थ केवल जीवन देना नहीं, बल्कि अहंकार, क्रोध और बदले की भावना को त्याग देना भी है। यह दिन याद दिलाता है कि सच्चा बलिदान वही होता है, जिसमें दूसरों की भलाई अपने हित से ऊपर रखी जाए।

आज की दुनिया में, जहाँ हर व्यक्ति अपने अधिकारों की बात करता है, Good Friday 2026 हमें यह सोचने पर मजबूर करता है—
क्या हम कभी दूसरों के लिए थोड़ा रुक सकते हैं?
क्या हम क्षमा को कमजोरी नहीं, बल्कि शक्ति मान सकते हैं?

यीशु का त्याग आज भी प्रासंगिक क्यों है?

Good Friday का संदेश समय के साथ पुराना नहीं पड़ता, क्योंकि मानव स्वभाव आज भी संघर्ष, अहं और टकराव से भरा हुआ है। ऐसे में त्याग और करुणा का यह उदाहरण हमें बताता है कि स्थायी परिवर्तन हिंसा से नहीं, बल्कि सहनशीलता से आता है। यही कारण है कि यह दिन केवल ईसाइयों तक सीमित नहीं रहता—बल्कि हर उस व्यक्ति को छूता है, जो एक बेहतर समाज की कल्पना करता है।

Good Friday 2026 पर चर्चों में पढ़े जाने वाले उपदेश, प्रार्थनाएँ और मौन—सबका उद्देश्य यही होता है कि इंसान अपने भीतर झाँक सके। यह दिन सवाल पूछता है, उपदेश नहीं देता। और शायद इसी कारण इसका प्रभाव सबसे गहरा होता है।

👉 अब ज़रा आगे सोचिए:
अगर बलिदान और प्रेम ही Good Friday का केंद्र है, तो इसके बाद आशा कहाँ से आती है?

Good Friday और Easter Sunday का गहरा संबंध क्या है, और शोक कैसे आशा में बदलता है?

Good Friday और Easter Sunday को अलग-अलग देखकर समझना, इस पूरी आध्यात्मिक कथा को अधूरा समझने जैसा है। Good Friday जहाँ दुख, पीड़ा और मौन का प्रतीक है, वहीं Easter Sunday आशा, जीवन और विजय का संदेश देता है। दोनों के बीच का यह संबंध हमें सिखाता है कि जीवन में अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, उसके बाद उजाला अवश्य आता है।

Good Friday के दिन सब कुछ समाप्त होता हुआ-सा लगता है—सूली, पीड़ा और मृत्यु। लेकिन ईसाई विश्वास के अनुसार, यही अंत वास्तव में एक नए आरंभ की भूमिका होता है। यदि Good Friday न होता, तो Easter Sunday का महत्व भी समझ में नहीं आता। शोक की गहराई ही आशा की ऊँचाई तय करती है।

मृत्यु के बाद पुनरुत्थान की अवधारणा क्या सिखाती है?

ईसाई मान्यता के अनुसार, Good Friday के बाद तीसरे दिन यीशु मसीह का पुनरुत्थान हुआ। यह घटना केवल चमत्कार की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश देती है कि सत्य और प्रेम को कभी पूरी तरह पराजित नहीं किया जा सकता। मृत्यु, जिसे सबसे बड़ा अंत माना जाता है, यहाँ एक नए जीवन का द्वार बन जाती है।

यह अवधारणा मानव जीवन से गहराई से जुड़ती है। जब इंसान अपने जीवन में असफलता, दुःख या टूटन का सामना करता है, तब Easter का संदेश उसे याद दिलाता है—
👉 हर Good Friday के बाद एक Easter जरूर आता है।

शोक से आशा तक की यात्रा क्यों इतनी महत्वपूर्ण है?

Good Friday और Easter Sunday के बीच का समय केवल कैलेंडर के पन्नों का अंतर नहीं है, बल्कि यह मानसिक और आत्मिक यात्रा का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि भावनाओं को दबाना नहीं चाहिए—शोक को महसूस करना जरूरी है, तभी आशा सच्ची बनती है।

आज की दुनिया में, जहाँ लोग तुरंत खुश दिखना चाहते हैं और दुःख से भागते हैं, Good Friday–Easter की यह यात्रा हमें ठहरना सिखाती है। यह बताती है कि दर्द से गुजरना कमजोरी नहीं, बल्कि परिवर्तन की प्रक्रिया है

Good Friday 2026 पर जब लोग मौन रखते हैं और प्रार्थना करते हैं, तो वे वास्तव में Easter की तैयारी कर रहे होते हैं—एक ऐसे दिन की, जो बताता है कि जीवन अंत नहीं होता, बस रूप बदलता है।

👉 अब खुद से पूछिए:
क्या आपने कभी अपने जीवन के किसी “Good Friday” को आने वाले “Easter” की शुरुआत माना है?

भारत में Good Friday कैसे मनाया जाता है, और हमारी सांस्कृतिक विविधता में इसका क्या महत्व है?

भारत में Good Friday केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक भी है। विविधताओं से भरे भारत में यह दिन शांति और मौन के साथ मनाया जाता है—जहाँ अलग-अलग राज्यों में परंपराएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन भावना एक ही रहती है: त्याग की स्मृति और आत्म-चिंतन

Good Friday 2026 पर देश के अधिकांश हिस्सों में यह दिन सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाएगा। स्कूल, कॉलेज और कई सरकारी संस्थान बंद रहते हैं, ताकि लोग चर्च जाकर प्रार्थना कर सकें या घर पर शांत वातावरण में इस दिन का महत्व समझ सकें। यह व्यवस्था बताती है कि भारत में अल्पसंख्यक धार्मिक पर्वों को भी सम्मान और संवैधानिक संरक्षण मिलता है।

⛪ चर्चों में होने वाली विशेष प्रार्थनाएँ क्या दर्शाती हैं?

Good Friday के दिन चर्चों में घंटियाँ नहीं बजतीं, वेदियाँ सजी नहीं होतीं और माहौल गंभीर रहता है। कई जगहों पर क्रूस-वंदना, पैशन रीडिंग और मौन प्रार्थनाएँ होती हैं। यह सब किसी परंपरा का बोझ नहीं, बल्कि उस पीड़ा की स्मृति है जिसे मानवता के लिए सहा गया माना जाता है।
यह मौन अपने-आप में एक संदेश देता है—कभी-कभी शब्दों से ज़्यादा प्रभाव खामोशी में होता है।

उपवास और संयम का सामाजिक अर्थ क्या है?

भारत में बहुत से ईसाई Good Friday 2026 पर उपवास रखते हैं या सादा भोजन करते हैं। यह उपवास केवल धार्मिक नियम नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन और सहानुभूति का अभ्यास है। जब इंसान अपनी सुविधाएँ सीमित करता है, तब वह दूसरों के दुख को बेहतर समझ पाता है—और यही इस दिन का मूल उद्देश्य है।

क्षेत्रीय विविधता में एकता कैसे दिखती है?

गोवा, केरल, तमिलनाडु, पूर्वोत्तर राज्य—हर जगह Good Friday मनाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। कहीं जुलूस निकलते हैं, कहीं पहाड़ी रास्तों पर क्रूस-यात्रा होती है, तो कहीं पूरी बस्ती मौन में डूबी रहती है। लेकिन इन सबके बीच एक बात समान है—सम्मान और श्रद्धा
यही भारत की विशेषता है, जहाँ एक धर्म का पर्व भी सामूहिक सांस्कृतिक अनुभव बन जाता है।

👉 अब ज़रा आगे सोचिए:
जब Good Friday हमें मौन, संयम और करुणा सिखाता है, तो क्या यह संदेश केवल एक दिन के लिए है?

Good Friday 2026 से हमें अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में क्या आत्मसात करना चाहिए?

Good Friday 2026 केवल अतीत की एक स्मृति नहीं है, बल्कि यह आज के जीवन के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक भी है। यह दिन हमें उपदेश देने के बजाय, भीतर झाँकने का मौका देता है—और यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। जब हम इस दिन के मूल संदेश को समझते हैं, तो यह हमारे व्यवहार, रिश्तों और सोच तक को प्रभावित करता है।

क्षमा को कमजोरी नहीं, शक्ति क्यों मानना चाहिए?

Good Friday का सबसे गहरा संदेश है—क्षमा। आज के समय में, जहाँ छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते टूट जाते हैं, यह दिन याद दिलाता है कि क्षमा करना हार नहीं, बल्कि साहस है। जब हम माफ करते हैं, तो सामने वाले को ही नहीं, खुद को भी मानसिक बोझ से मुक्त करते हैं।
Good Friday 2026 पर खुद से पूछना ज़रूरी है:
👉 क्या मैं आज किसी को माफ कर सकता/सकती हूँ—अपने सुकून के लिए?

करुणा और सहानुभूति का अभ्यास कैसे करें?

यह दिन हमें दूसरों के दर्द को महसूस करने की सीख देता है। करुणा का अर्थ बड़े त्याग से नहीं, बल्कि छोटे मानवीय व्यवहारों से भी पूरा होता है—किसी की बात सुन लेना, ज़रूरतमंद की मदद करना, या बिना शर्त साथ खड़ा रहना।
जब हम Good Friday के संदेश को व्यवहार में उतारते हैं, तो समाज अपने-आप थोड़ा और संवेदनशील बन जाता है।

मौन और आत्म-चिंतन क्यों ज़रूरी है?

Good Friday पर मौन का विशेष महत्व है। यह मौन हमें शोर से दूर ले जाकर, खुद की आवाज़ सुनने का अवसर देता है। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कुछ पल रुकना—सोचने, समझने और स्वीकार करने के लिए—एक तरह का आत्मिक उपचार है।
Good Friday 2026 हमें याद दिलाता है कि हर समस्या का समाधान बाहर नहीं, कई बार भीतर ही छुपा होता है।

समाज के लिए यह संदेश क्यों महत्वपूर्ण है?

अगर Good Friday के मूल मूल्य—त्याग, क्षमा और करुणा—सिर्फ एक दिन तक सीमित न रहें, तो समाज में टकराव अपने-आप कम हो सकता है। यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि मैं समाज को क्या दे रहा हूँ, न कि सिर्फ क्या ले रहा हूँ।

👉 अब आख़िरी सवाल आपसे:
क्या Good Friday 2026 आपके लिए सिर्फ एक अवकाश रहेगा, या आत्म-परिवर्तन की शुरुआत?

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❓ Good Friday 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q: Good Friday 2026 कब है?

Good Friday 2026 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। यह Easter Sunday से ठीक दो दिन पहले आता है।

Q: Good Friday को “Good” क्यों कहा जाता है, जबकि यह शोक का दिन है?

क्योंकि ईसाई विश्वास के अनुसार, इसी दिन हुए बलिदान से मानवता को मोक्ष और आशा का मार्ग मिला। दुख के बावजूद इसका परिणाम “अच्छा” माना जाता है।

Q: क्या Good Friday भारत में सरकारी अवकाश होता है?

हाँ, भारत में Good Friday कई राज्यों में सरकारी अवकाश के रूप में मनाया जाता है, जिससे लोग इस दिन प्रार्थना और आत्म-चिंतन कर सकें।

Q: Good Friday पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

इस दिन सामान्यतः:
प्रार्थना, मौन और आत्म-चिंतन किया जाता है
उपवास या सादा भोजन किया जाता है
उत्सव, पार्टी या शुभ आयोजनों से परहेज किया जाता है

Q: क्या Good Friday केवल ईसाइयों के लिए ही महत्वपूर्ण है?

नहीं। इसका संदेश—त्याग, क्षमा और करुणा—सार्वभौमिक है, जो हर धर्म और समाज के लिए प्रासंगिक है।

निष्कर्ष: Good Friday 2026 हमें दर्द नहीं, बल्कि उम्मीद क्यों सिखाता है?

Good Friday 2026 हमें यह याद दिलाने आता है कि जीवन में आने वाला हर अंधकार स्थायी नहीं होता। यह दिन केवल शोक या पीड़ा की स्मृति नहीं है, बल्कि त्याग के माध्यम से आशा की उत्पत्ति का प्रतीक है। जिस तरह Good Friday के बिना Easter Sunday की कल्पना अधूरी है, उसी तरह जीवन के संघर्षों के बिना सच्चे परिवर्तन की कल्पना भी संभव नहीं।

यह पर्व हमें सिखाता है कि चुप्पी भी एक भाषा होती है, और क्षमा सबसे बड़ी शक्ति। जब पूरी दुनिया शोर, प्रतिस्पर्धा और टकराव में उलझी हो, तब Good Friday का मौन हमें रुककर सोचने का अवसर देता है—मैं कौन हूँ, और मैं किस तरह का इंसान बनना चाहता हूँ?

Good Friday 2026 का सबसे बड़ा संदेश यही है कि प्रेम कभी व्यर्थ नहीं जाता। बलिदान कभी पराजय नहीं होता। और हर “अंत” अपने भीतर एक नई शुरुआत छुपाए रहता है। यही कारण है कि यह दिन केवल ईसाइयों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हर उस व्यक्ति से जुड़ता है जो मानवीय मूल्यों में विश्वास रखता है।

अगर इस दिन से हम अपने जीवन में थोड़ी-सी करुणा, थोड़ी-सी क्षमा और थोड़ा-सा धैर्य भी आत्मसात कर लें, तो Good Friday 2026 वास्तव में “Good” बन जाता है—केवल नाम से नहीं, अर्थ से भी।

👉 अगर यह लेख आपको सोचने पर मजबूर करे, तो इसे ज़रूर साझा करें—क्योंकि उम्मीद बाँटने से बढ़ती है।

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