सोमवार व्रत कैसे करें? संपूर्ण विधि, आहार, नियम और सोलह सोमवार जानकारी
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सोमवार व्रत कैसे करें? संपूर्ण विधि, आहार, नियम और सोलह सोमवार जानकारी

सोमवार व्रत विधि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाने वाला पवित्र उपवास है। इस व्रत में प्रातः स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है, “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप किया जाता है और दिन भर सात्विक आचरण रखा जाता है। श्रद्धा अनुसार निर्जल या […]

शीतला अष्टमी 2026 पर माता शीतला का दिव्य चित्र
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शीतला अष्टमी 2026: तिथि, महत्व, पूजा विधि, व्रत कथा और बसोड़ा परंपरा का पूरा विवरण

शीतला अष्टमी 2026 में 11 मार्च को मनाई जाएगी। यह पर्व माता शीतला की पूजा के लिए समर्पित है, जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। इस दिन एक दिन पूर्व बनाया गया शीतल भोजन माता को अर्पित किया जाता है और घर में अग्नि प्रज्वलित नहीं की जाती। व्रत का मुख्य

रंग पंचमी 2026 का पारंपरिक रंग उत्सव
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रंग पंचमी कब है 2026? जानें सही तिथि, कथा और महत्व

रंग पंचमी 2026 कब है? जानें फाल्गुन शुक्ल पंचमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और रंग पंचमी मनाने की परंपराएँ। यहाँ पढ़ें सम्पूर्ण जानकारी सरल हिंदी में। रंग पंचमी 2026 रविवार, 8 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। यह चैत्र मास की कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि को पड़ती है। इस दिन लोग

हरतालिका तीज 2026 में शिव पार्वती पूजा करती महिलाएं
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हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें सही तिथि, व्रत कथा और पूजा विधि

हरतालिका तीज 2026 भाद्रपद शुक्ल तृतीया को 14 सितंबर 2026, सोमवार के दिन मनाई जाएगी। यह निर्जला व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए रखा जाता है तथा इसका पारण 15 सितंबर 2026 को चतुर्थी तिथि में किया जाएगा। हरतालिका तीज 2026 का यह पावन पर्व स्त्री संकल्प, श्रद्धा और अखंड सौभाग्य

राम नवमी 2026 कब है ? भगवान श्रीराम 26 मार्च तिथि शुभ मुहूर्त चित्र
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राम नवमी 2026 कब है? सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

राम नवमी 2026 कब है? वर्ष 2026 में राम नवमी का पावन पर्व 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल नवमी तिथि 26 मार्च को सूर्योदय काल में विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन श्रीराम जन्मोत्सव शास्त्रसम्मत रूप से मनाया जाएगा। मध्यान्ह काल में विशेष पूजा का विधान है। राम नवमी

Durga Ashtami 2026 कब है ? सही तिथि और कन्या पूजन मुहूर्त
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Durga Ashtami 2026 कब है? सही तिथि, पूजा विधि और कन्या पूजन मुहूर्त

Durga Ashtami 2026 26 मार्च (गुरुवार) को मनाई जाएगी। यह चैत्र शुक्ल अष्टमी की तिथि है और इसी दिन कन्या पूजन तथा विशेष देवी पूजा का विधान है। यदि आप सही तिथि, पूजा विधि और कन्या पूजन का शुभ समय जानना चाहते हैं, तो नीचे पूरी प्रमाणित जानकारी पढ़ें और सही दिन पर व्रत एवं

रंगभरी एकादशी 2026 वाराणसी में शिव पार्वती दर्शन, काशी विश्वनाथ मंदिर और गुलाल उत्सव का दृश्य
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रंगभरी एकादशी 2026: पूजा, कथा और काशी के गुलाल-उत्सव की पूरी गाइड

रंगभरी एकादशी 2026 फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाएगी। यह पर्व विशेष रूप से वाराणसी में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती को विवाह के बाद पहली बार काशी लेकर आए थे, और उसी खुशी में शिवभक्त गुलाल अर्पित करते हैं।

Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana Kalash with coconut, mango leaves, barley and diya in home temple setting
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Chaitra Navratri 2026 कब शुरू होगी? जानें सही तिथि और समय

Chaitra Navratri 2026 19 मार्च (गुरुवार) से शुरू होगी और 27 मार्च को राम नवमी के साथ समाप्त होगी। घटस्थापना 19 मार्च को प्रातः शुभ मुहूर्त में की जाएगी। यदि आप 19 या 20 मार्च को लेकर भ्रम में हैं, तो पंचांग के अनुसार 19 मार्च ही सही तिथि है। Chaitra Navratri 2026 की सही

Amalaki Ekadashi 2026 पर आंवला वृक्ष की पूजा
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Amalaki Ekadashi 2026 कब है? इस पावन दिन करें यह खास पूजा, जीवन में आएगा सुख और समृद्धि

Amalaki Ekadashi 2026 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है और भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन आंवला (आमलकी) वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। यह केवल एक व्रत तिथि नहीं, बल्कि संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर है। यदि आप

फाल्गुन पूर्णिमा 2026 की तिथि, व्रत विधि और होली से जुड़ा धार्मिक महत्व दर्शाती तस्वीर
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फाल्गुन पूर्णिमा 2026 कब है? तिथि, समय और संपूर्ण पूजा विधि

फाल्गुन पूर्णिमा 2026 मंगलवार, 03 मार्च 2026 को पड़ेगी। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 02 मार्च सायं लगभग 05:55 बजे से शुरू होकर 03 मार्च सायं लगभग 05:07 बजे तक रहेगी। यह दिन धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ माना जाता है और होलिका दहन, व्रत, पूजा तथा चंद्र देव की उपासना का विशेष महत्व रखता है।

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