भारतीय ग्रामीण संस्कृति और लोक जीवन
लोक संस्कृति

ग्रामीण संस्कृति: भारतीय लोक परंपराओं की आत्मा, जीवन-दृष्टि और सांस्कृतिक निरंतरता की शाश्वत आधारशिला

प्रस्तावना: भारत को समझने की असली कुंजी ग्रामीण संस्कृति, भारतीय समाज की उस सामूहिक जीवन-दृष्टि को दर्शाती है, जिसे हम व्यापक रूप से लोक संस्कृति के रूप में पहचानते हैं। भारत को यदि केवल उसके महानगरों, औद्योगिक प्रगति और आधुनिक तकनीक के माध्यम से समझने की कोशिश की जाए, तो यह समझ अधूरी रह जाती […]

पौष अमावस्या
धार्मिक ज्ञान

पौष अमावस्या: स्नान, दान और पितृ तर्पण का महापर्व

भूमिका (Introduction) पौष अमावस्या हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। यह दिन शीत ऋतु के मध्य आता है और भारतीय धार्मिक परंपरा में स्नान, दान, संयम, मौन तथा पितृ तर्पण के लिए विशेष रूप से पुण्यदायी माना गया है। अमावस्या तिथि स्वयं अंतर्मुखी साधना, आत्मचिंतन और त्याग का

सरस्वती पूजा विधि
धार्मिक ज्ञान

सरस्वती पूजा विधि : बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की पूजा – संपूर्ण विधान

सरस्वती पूजा विधि बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की आराधना का पूर्ण विधान है। इस दिन ज्ञान, विद्या, कला और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती की पूजा कर पढ़ाई, समझ और विवेक की कामना की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से बच्चों, विद्यार्थियों और कलाकारों से जुड़ी मानी जाती है। भूमिका (Introduction) सरस्वती

बसंत पंचमी
हिन्दू त्योहार

बसंत पंचमी: ज्ञान, विद्या और नवचेतना का पावन पर्व

भूमिका (Introduction) बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पावन और अर्थपूर्ण पर्व है, जो ज्ञान, विद्या, वाणी और सृजनशीलता की देवी माँ सरस्वती की आराधना से जुड़ा हुआ है। यह पर्व माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और इसी दिन से वसंत ऋतु के आगमन की परंपरागत मान्यता

पौष पूर्णिमा पर स्नान, दान और आध्यात्मिक शुद्धि
धार्मिक ज्ञान

पौष पूर्णिमा व्रत: स्नान, दान और आत्मशुद्धि का पावन पर्व

भूमिका (Introduction) पौष पूर्णिमा व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। शीत ऋतु के मध्य आने वाला यह व्रत स्नान, दान, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूर्णिमा का चंद्रमा जहाँ मन की शांति और संतुलन का संकेत देता है, वहीं

माघ बिहू
लोक संस्कृति

माघ बिहू (भोगाली बिहू): असम की कृषि संस्कृति, सामूहिकता और कृतज्ञता का पर्व

भूमिका (Introduction) माघ बिहू, जिसे भोगाली बिहू भी कहा जाता है, असम का एक प्रमुख कृषि और लोक पर्व है। यह पर्व हर वर्ष जनवरी महीने में, फसल कटाई के बाद, बड़े उत्साह और सामूहिक आनंद के साथ मनाया जाता है। माघ बिहू केवल भोजन और उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि यह परिश्रम की

जैन त्योहार
अन्य धर्मों के त्योहार

जैन त्योहार: अहिंसा, तप, क्षमा और आत्मशुद्धि की शाश्वत परंपरा

प्रस्तावना – जैन त्योहारों की आध्यात्मिक भूमिका जैन धर्म में मनाए जाने वाले जैन त्योहार केवल सामाजिक या पारंपरिक उत्सव नहीं हैं, बल्कि ये आत्मा की शुद्धि और आत्मसंयम के विशेष अवसर माने जाते हैं। जैन परंपरा में पर्वों का उद्देश्य बाहरी आनंद या दिखावे से अधिक, व्यक्ति को अंतर्मुखी बनाना है। इन त्योहारों के

मुस्लिम त्योहार के अवसर पर नमाज़ के बाद एक-दूसरे को मुबारकबाद देते लोग
अन्य धर्मों के त्योहार

मुस्लिम त्योहार: इस्लाम धर्म के प्रमुख पर्व और परंपराएँ

भूमिका (Introduction) मुस्लिम त्योहार इस्लाम धर्म की आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों का समन्वित रूप हैं। ये पर्व केवल उत्सव या परंपरा नहीं, बल्कि ऐसे अवसर हैं जो व्यक्ति को आत्मसंयम, इबादत, करुणा और समानता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। इस्लाम में त्योहारों की संख्या सीमित है, किंतु उनका प्रभाव

पुत्रदा एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा करते श्रद्धालु
धार्मिक ज्ञान

पुत्रदा एकादशी व्रत: कथा, विधि और संपूर्ण महत्व

भूमिका (Introduction) हिंदू धर्म में व्रत-उपवास केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन को संयमित, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाने की साधना माने जाते हैं। इन्हीं व्रतों में एकादशी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष में आने वाली एकादशियों में पुत्रदा एकादशी व्रत को विशेष फलदायी माना गया है। यह व्रत संतान-सुख, पारिवारिक स्थिरता और

मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान
धार्मिक ज्ञान

मौनी अमावस्या: महत्व, स्नान-दान, मौन व्रत और आध्यात्मिक अर्थ

भूमिका (Introduction) हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष स्थान है, क्योंकि यह आत्मचिंतन, संयम और साधना का अवसर प्रदान करती है। मौनी अमावस्या भारतीय संस्कृति में आत्मसंयम, शांति और साधना का विशेष पर्व मानी जाती है। अमावस्या के दिनों में चंद्रमा दिखाई नहीं देता, इसलिए यह समय भीतर की यात्रा का प्रतीक माना गया

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